Diwali: दिवाली क्या है? क्यों और कैसे बनाते है दिवाली?

दिवाली (Diwali) या दीपावली हिंदू धर्म के प्रमुख और सबसे लोकप्रिय, धार्मिक त्योहारों में से एक है। दीवाली असत्य पर सत्य की विजय और अंधकार से प्रकाश का प्रतीक है। दिवाली का त्यौहार पांच दिनों तक चलता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह त्यौहार आमतौर पर अक्टूबर और नवंबर में आता है। “दीपावली” शब्द दीयों की पंक्तियों, या मिट्टी के दीयों को संदर्भित करता है। देवी लक्ष्मी विष्णु की पत्नी हैं और वह धन और समृद्धि का प्रतीक हैं। दिवाली पर देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन धन की देवी लक्ष्मी जी को घर में आमंत्रित करने के लिए रात को मिट्टी के दीये जलाये जाते है।

उत्तर भारत में यह त्योहार भगवान राम के 14 साल के वनवास को पूरा करने के बाद उनके राज्य अयोध्या लौटने की याद में मनाया जाता है। इस त्योहार को पश्चिम बंगाल में “काली पूजा” के रूप में मनाया जाता है, और माता काली की दिवाली के दौरान पूजा की जाती है। दक्षिण भारत में दिवाली का त्योहार असम के असुर राजा नरकासुर पर भगवान कृष्ण की जीत का स्मरण करता है, जिसने कई लोगों को कैद कर रखा था। माना जाता है कि कृष्ण ने नरकासुर को मारने के बाद सभी कैदियों को मुक्त कराया था।

भारत में बौद्ध के लिए दिवाली (Diwali) का समय सम्राट अशोक के बौद्ध धर्म में परिवर्तन की वर्षगांठ का प्रतीक हैं ।
जैन धर्म मनाने वाले कुछ लोग यह पर्व 527 ईसा पूर्व महावीर (या भगवान महावीर) निर्वाण की प्राप्ति की वर्षगांठ के रूप में मनाते हैं। महावीर ने जैन धर्म के आध्यात्मिक विचारों की स्थापना की। कई जैन अपने सम्मान में रोशनी का त्योहार मनाते हैं।

सिख धर्म में दिवाली (Diwali) 18वीं सदी से मनाई जाती रही है, बताया जाता है कि जब गुरु हरगोबिंद ग्वालियर में एक कैद से अमृतसर लौटे थे तब अमृतसर के निवासियों ने इस मौके को सेलिब्रेट करने के लिए पूरे शहर में दीये जलाए थे।

कैसे मनाते है दिवाली? क्या करते हैं लोग-

दिवाली (Diwali) का जश्न पांच दिनों तक चलेगा। कई लोगों बिजली की रोशनी या छोटे मिट्टी के तेल के लैंप के साथ अपने घर और कार्यस्थलों को सजाने है। मोमबत्तियों और पानी से भरे कटोरे के अन्दर पानी की सतह पर तैरते हुए फूलों को भी सजाते हैं। मंदिरों में मिट्टी के दिये की पंक्तियों में बनाते हैं।
लोग दिवाली (Diwali) से पहले अपने घरों और दुकानो की सफाई करते हैं। वे खुद पानी और सुगंधित तेलों से नहाते है और नए कपड़े पहनते हैं फिर परिवार के सदस्यों, करीबी दोस्तों और व्यापारिक सहयोगियों को मिठाई के उपहार देते हैं। कुछ इलाकों में शाम से ही आतिशबाजी शुरू हो जाती है। कई कस्बों और गांवों में मेलों का आयोजन किया जाता है। व्यापारी धार्मिक समारोह करते हैं और नए खाते की किताबें खोलते हैं। यह आम तौर पर यात्रा के लिए एक समय है।

सार्वजनिक जीवन पर दिपावली का असर

दिवाली (Diwali) पर भारत में सरकारी दफ्तर, डाकघर और बैंक आदि बंद हैं। स्टोर और अन्य व्यवसाय बंद हो सकते हैं या उनके खुलने का समय कम हो सकता है। परिवहन आमतौर पर चालू रहते है क्योंकि कई स्थानीय लोग धार्मिक समारोहों के लिए यात्रा करते हैं ।

बिजली की रोशनी, मिट्टी और आग की लपटों से बने छोटे तेल के दिये दीपावली या दिवाली (Diwali) के महत्वपूर्ण और प्रमुख प्रतीक हैं । वे प्रकाश के भौतिक और आध्यात्मिक दोनों पहलुओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।

 

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