Myanmar: Refugees को देश में शरण देना क्या सही है?

Refugees की समस्या दिन पर दिन बढती जा रही है और म्यांमार (Myanmar) में हो रहे सैन्य गतिरोध का हर तरफ से निन्दा हो ही रही है। सैन्य गतिरोध के अलावा भी यहाँ रोहिंग्या मुस्लिम के ऊपर हो रहे अत्याचार का भी खबरे काफी निन्दाजनक साबित हुई है। स्वयं UN, US, UK के अलावा अन्य कई देशों ने म्यांमार में हो रहे अहिंसा पर दुःख जताते हुए इन सबको खत्म करने का आदेश भी दिया लेकिन यह तनाव खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा। अभी वर्तमान समय में हो रहे विद्रोह का विरोध करने के लिए वहाँ की जनता सङकों पर उतर आई, पर हालात इतने खराब हो रहे है और military द्वारा हो रहे अत्याचार से बचने के लिए वहाँ की जनता अपना घर-कारोबार सब छोङ कर बंगलादेश और भारत से शरण लेकर मदद की गुहार कर रहे है।

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म्यांमार (Myanmar) से भागे हुए Refugees अब कहाँ किस हाल में है?

म्यांमार में हो रहे इस हिंसा की निन्दा हर जगह देखने को मिल रही है। वहाँ की जनता अपने घर छोङ दूसरे देशो में भागने के लिए मजबूर है। जब रोहिंग्या मुस्लिम पर अत्याचार हो रहे थे तब वे लोग अपने बचाव के लिए बंगलादेश के Cox Market में शरण लेने को मजबूर हो गए। बंगलादेश की सरकार ने इन रोहिंग्यो का अपने देश में शरण लेने से नहीं रोका लेकिन बाद मे रोहिंग्यो की संख्या बढने लगी और बंगलादेश की सरकार को अपने देश की आबादी को control में रखने के लिए इन पर रोक लगाना शुरू कर दिया। वर्तमान समय में बंगलादेश का यह Cox Market मे काफी Refugees, Refugee कैम्प में रह रहे है।

वहीं दूसरी तरफ अगर म्यांमार में हो रहे सैन्य गतिविरोध की बात करे तो कई लोग डर कर अपने घरो को छोङ भारत में रहने आए है। वहां की जनता मे से कई लोग सीमाएँ पार करके भारत के मिजोरम के चामपाई में रह रहे है। भारत सरकार ने इन्हे यहाँ रुकने से मना नही किया है पर यह आखिर ऐसे कब तक चलता रहेगा। वैसे तो कोरोना के वजह से देश की हालत बहुत खराब हो रखी है, आए दिन नये नये केस सामने आ रहे है। अब सरकार भी कोरोना के लिए लङे या फिर इन लोगो के अधिकार के लिए।

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Refugees को देश में entry  देना कितना गलत हो सकता है?

म्यांमार (Myanmar) में हुए हिंसा से बचने के लिए वहां की जनता बार्डर पार करके अपनी सीमाओं से सटे भारत के राज्यों जैसे मिजोरम, मणिपुर में शरण ले रही है। यदि भारत सरकार ऐसे ही हर किसी को शरण देते रहेगे तो यहां के लोगो का क्या होगा?

कोरोना के वजह से वैसे ही देश में बेरोजगारियां बढ गयी है, आर्थिक तंगी के दौर में भारत भी आखिर कब तक इन लोगो की मदद कर पाएगा। दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यहां अपने लोगो को कोरोना जैसी जानलेवा वायरस से बचाने के लिए अस्पतालों मे बेड की कमी हो रही है और ये लोग कैम्प में हजारो एवं लाखो की संख्या मे एक साथ रह रहे है।

आज के जमाने में नकली identity proof बनवाना कोई बङी बात नहीं रह गयी है कोई भी अराम से इसे बनवा सकता है। तो अब बात यह आती है की नकली identity proof बना कर कोई भी इस भीङ के सहारे देश में गैर कानूनी तरीके से दाखिल हो सकता है और देश मे संगीन जुर्म जैसे आतंकवादी हमला को अंजाम दे सकता है। तो अब यह मानना गलत नहीं हो सकता की इन Refugees को देश मे पनह देना गलत साबित भी हो सकता है। Refugees को शरण देने से पहले उन लोगो का अच्छे से जांच परताल करना आवश्यक कर देना चाहिए। और जल्द से जल्द उन्हें उनके देश भेज देना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बंगलादेश के दौरे में भी Refugees के हालातो पर चर्चा की और बंगलादेश को पूरी तरह से support करने का आश्वासन भी दिया।

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