Triple Mutant: जानिए कोरोना का क्या है बंगाल कनेक्शन?

कोरोना का कहर है कि थमने का नाम ही नहीं ले रहा, बल्कि दिन पर दिन बलवान और बलवान होता चला जा रहा है। कोरोना की दूसरी लहर का जिम्मेदार अब तक डबल म्यूटेंट (Double Mutant) को ठहराया जा रहा है। अभी कोरोना वायरस (Coronavirus) का ये डबल म्यूटेंट देश में कहर बरपा ही रहा है कि इसका एक और वैरिएंट (Variant) का पता चला है यानी कोरोना का ट्रिपल म्यूटेंट वैरिएंट (Triple Mutant) का भी पता चल गया है। कोरोना के इस ट्रिपल म्यूटेंट (Triple Mutant) को ‘बंगाल वेरिएंट’ (Bengal Variant) भी कहा जा रहा है। तो कोरोना का क्या है बंगाल कनेक्शन? क्यों इसे ‘बंगाल वेरिएंट’ कहा जा रहा है। कितना खतरनाक है ये वेरिएंट और क्या है इससे बचाव के तरीके आज हम आपको सब बताएंगे।

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वायरस एक, वेरिएंट अनेक!

दरअसल, कोई वायरस जितना ज़्यादा फैलता है, वो म्यूटेंट भी उतना ही ज़्यादा करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोना वायरस अब तक लाखों बार म्यूटेट हो चुका है, हालांकि 4 नए प्रकार के कोविड वेरियंट ही अब तक मिले हैं। B.1.1.7 या यूके वेरिएंट (Variant) जो बाकियों से 40 से 70 फीसदी तक ज्यादा संक्रामक है और इसमें मौत की आशंका 60 फीसदी तक बढ़ जाती है। ब्रजील वेरिएंट जो यूके वेरिएंट से भी ज्यादा खतरनाक है और एंटीबॉडी (Antibody) को धोखा देने में सक्षम है। B.1.351 या दक्षिण अफ्रीकी वेरिएंट (Variant) जो करीब 20 देशों में पाया गया, ये भी एंटीबॉडी (Antibody) को धोखा देना जानता है। B.1.617 या भारत का डबल म्यूटेंट (Double Mutant) जिसे दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। इसके साथ ही अब एक ट्रिपल म्यूटंट (Triple Mutant) B.1.618 के मिलने से वैज्ञानिक कम्युनिटी को आश्चर्य में डाल दिया है। इसी ट्रिपल म्यूटेंट (Triple Mutant) को ‘बंगाल वेरिएंट’ (Bengal Variant) कहा जा रहा है।

बंगाल वेरिएंट (Bengal Variant) ही क्यों पड़ा नाम ?

दरअसल, कोरोना के इस ट्रिपल म्यूटेंट (Triple Mutant) का नाम बंगाल वेरिएंट (Bengal Variant) इस लिए पड़ा क्योंकि पहले ये बांग्लादेश में था। बांग्लादेश में जब वायरस का जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing) की तो करीब 80 फीसदी म्यूटेंट ये वेरिएंट मिले। इसके बाद भारत में पश्चिम बंगाल (West Bengal) में पहली बार इस वेरिएंट को देखा गया जिस कारण से ‘बंगाल वैरिएंट’ (Bengal Variant) कहा जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ट्रिपल म्यूटेंट कोरोना के तीन अलग-अलग स्ट्रेन का कॉम्बिनेशन है या इसे इस तरह भी समझ सकते हैं कि कोरोना वायरस (Coronavirus) के तीन रूप मिलकर एक नया अवतार लिया है। ट्रिपल म्यूटेशन में H146 और Y145 नामक स्पाइक प्रोटीन वायरस से गायब हो गए। इस वेरिएंट में दो तरह की स्पाइक प्रोटीन (Spike Protein) में बदलाव हुआ। इन स्पाइक प्रोटीन को E484K और D614G नाम दिया गया है। हालांकि, वायरस का ये नया अवतार कितना घातक या संक्रामक है, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक, इसमें E484K म्यूटेशन दिख रहा है, जो चिंता का कारण है।

आखिर क्या है जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing) ?

किसी भी देश में जितने सेम्पल टेस्ट होते हैं, उनमें से 5 फीसदी की सिक्वेंसिंग (Sequencing) की जाती है। ताकि ये पता चल सके कि वायरस में कैसे बदलाव हो रहे है। कोई वायरस कैसा है, किस तरह दिखता है, जीनोम से ही इसकी सारी जानकारी मिलती है। इससे ही वायरस के नए स्ट्रेन के बारे में पता चला है। इसी के आधार पर वायरस के लिए दवा या वैक्सीन (Vaccine) बनाई जाती है।

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कोरोना का ट्रिपल म्यूटेंट ज्यादा खतरनाक!

वैज्ञानिकों ने कोरोना के इस नए वेरिएंट का नाम B.1.618 दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसमें पाए जाने वाले जेनेटिक वेरिएंट बेहद चालाक है और ये वैसे लोगों पर भी हमला कर सकता है, जिनके शरीर में एंटीबॉडी पहले ही बन चुकी है। यानी इस वायरस से एक बार ठीक हो चुके लोग या फिर वैक्सीन ले चुके लोग भी इस वायरस के हमले का शिकार हो सकते हैं। हालांकि ये बात भी अभी साबित नहीं हुई है। दरअसल, वायरस भी खुद के खिलाफ बन रही दवाइयों और वैक्सीन को धोखा देने के लिए और अपने वजूद को बचाए रखने के लिए खुद को बदलता रहता है। इस समय देश में जो बहुत ज्यादा संक्रामक हमें कोरोना वायरस (Coronavirus) नजर आ रहा है उसके पीछे इस ट्रिपल म्यूटेंट (Triple Mutant) की भूमिका हो सकती है लेकिन अभी इस पर सोध जारी है। वायरस का ये वेरिएंट बेहद खतरनाक इस हिसाब से भी है कि इसमें संक्रमण तेजी से भी फैलता है और जो लोग इससे संक्रमित हो रहे हैं उनमें गंभीर लक्षण भी पाए जाते है।

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